चाय नीलामी (सांकेतिक तस्वीर)पश्चिम एशिया में जारी युद्ध संबंधी अनिश्चितता का असर अब भारतीय चाय कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है. कोच्चि चाय नीलामी में पारंपरिक (ऑर्थोडॉक्स) चाय की निर्यात मांग कमजोर पड़ने से इसके औसत दाम में गिरावट दर्ज की गई. कारोबारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान से जुड़ी नई भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने खरीदारों के रुख को सतर्क बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर प्रभावित हुए हैं.
नीलामी के दौरान ऑर्थोडॉक्स लीफ चाय की बिक्री में दबाव देखने को मिला. कुल 2,55,383 किलोग्राम चाय की पेशकश की गई, जिसमें करीब 85 प्रतिशत मात्रा की बिक्री हो सकी. हालांकि, मांग पूरी तरह कमजोर नहीं रही, लेकिन कीमतों पर असर साफ दिखा. औसत मूल्य पिछले हफ्ते के 184.78 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 178.60 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया यानी करीब 6 रुपये प्रति किलो की कमी दर्ज हुई.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चाय कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि खाड़ी देशों में ऑर्थोडॉक्स चाय की वास्तविक मांग अभी भी बनी हुई है, लेकिन मौजूदा हालात में खरीदार नई खरीद को लेकर इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं. चिंता इस बात की है कि अगर समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं या माल दूसरे बंदरगाहों पर अटकता है तो अतिरिक्त लागत और देरी का सामना करना पड़ सकता है. इसी वजह से कई आयातकों ने फिलहाल खरीद निर्णय टाल दिए हैं.
टी ट्रेड एसोसिएशन ऑफ कोचिन के अध्यक्ष अनिल जॉर्ज के मुताबिक, ऑर्थोडॉक्स लीफ चाय की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, लेकिन खरीदारी अब काफी चुनिंदा हो गई है. पश्चिम एशिया के खरीदार बाजार में सक्रिय रहे, जबकि सीआईएस देशों से भी कुछ समर्थन मिला. इसके बावजूद निर्यात आधारित खरीद पर्याप्त स्तर तक नहीं पहुंच सकी.
जहां ऑर्थोडॉक्स चाय दबाव में रही, वहीं सीटीसी डस्ट चाय खंड में बेहतर कारोबार देखने को मिला. अच्छी गुणवत्ता वाली चाय के दाम 1 से 3 रुपये प्रति किलो तक मजबूत हुए. इस श्रेणी में 7,15,105 किलोग्राम की पेशकश हुई और लगभग 88 प्रतिशत मात्रा बिक गई. हालांकि कुछ मात्रा वापस भी ली गई.
रिपोर्ट के मुताबिक, सीटीसी बाजार को सबसे ज्यादा समर्थन ब्लेंडर्स से मिला, जिन्होंने कुल बिकी मात्रा में लगभग 61 प्रतिशत हिस्सेदारी निभाई. इसके अलावा केरल के खुी चाय के कारोबारियों और देश के अन्य हिस्सों के खरीदारों की सक्रियता से बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली. कारोबारियों का मानना है कि वैश्विक हालात स्थिर होने पर निर्यात मांग फिर से गति पकड़ सकती है.
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